प्रोग्रेसिव इनकम टैक्स कैसे काम करता है
ज़्यादातर देश आय पर स्लैब (या 'ब्रैकेट') के हिसाब से टैक्स लगाते हैं। आप अपनी पूरी आय पर अपनी सबसे ऊँची दर नहीं चुकाते — सिर्फ उस हिस्से पर जो हर स्लैब के दायरे में आता है। इसीलिए आपकी प्रभावी दर (कुल टैक्स ÷ आय) हमेशा आपकी सीमांत (मार्जिनल) दर से कम होती है — यानी आपकी आखिरी कमाई गई रकम पर लगने वाली दर से।
टैक्स स्लैब एडिट क्यों किए जा सकते हैं
टैक्स की दरें, स्लैब और छूट हर देश में अलग होती हैं और लगभग हर साल बदलती हैं, इसलिए यह टूल एक उदाहरण के तौर पर दिया गया शेड्यूल लेकर आता है, जिसे आप अपनी स्थिति के मुताबिक एडिट करते हैं। अपने स्थानीय स्लैब और दरें डालें, कोई टैक्स-फ्री छूट या स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ें, और कैलकुलेटर आपका कुल टैक्स, टेक-होम आय और हर स्लैब में बनने वाला टैक्स दिखा देगा।
ज़रूरी डिस्क्लेमर
यह सिर्फ शिक्षा के मकसद से दिया गया एक सरल अनुमान है। इसमें सोशल सिक्योरिटी या नेशनल इंश्योरेंस योगदान, टैक्स क्रेडिट, स्थानीय या राज्य के टैक्स, अलग-अलग फाइलिंग स्टेटस, या कैपिटल गेन्स के नियम शामिल नहीं हैं। किसी भी अहम फैसले के लिए अपने स्थानीय टैक्स प्राधिकरण या किसी योग्य अकाउंटेंट से सलाह लें।